0
मन का कोई ग्राहक नहीं
![]()
मन का कोई ग्राहक नहीं तथा मन को भी वास्तव में जगत से कुछ प्रिय नहीं लगता, इसलिये एक पदार्थ...
![]()
मन का कोई ग्राहक नहीं तथा मन को भी वास्तव में जगत से कुछ प्रिय नहीं लगता, इसलिये एक पदार्थ...